Saturday, 5 January 2013

दूध की धुली नारियाँ -

फ़िल्मी परदे पर अठखेलियाँ-
विज्ञापन में मजाक उडाती चेलियाँ 
पड़ोसन अल्बेलियाँ 
जो मुंह-बोले भतीजों से लगवाती रहती हैं पीठ पर साबुन
लिव-इन-रिलेशन - 
गुप्त-सम्बन्ध 
बनाती रहती है स्वयं नए रिश्ते-
नाबालिग छोरों को सीधे सीधे फाँसती 
फिर भी सती -
लड़कों का करती बालात्कार-
न्याय का समान अधिकार 
इसे भी करें शामिल 
नए प्रावधानों में -

1 comment:

  1. लज्जा की प्रतिमूर्ति को, मिला नपुंसक नाथ |
    काम वासना के लिए, क्यूँ ढूँढे नहिं पाथ ?
    क्यूँ ढूँढे नहिं पाथ, उसे भी ज्वर चढ़ता है |
    जो भी हत्थे चढ़े, सहारा बन बढ़ता है |
    माने रविकर पक्ष, बिगाड़े पर क्या काकी ?
    फ़ोकट में दे पाठ, बात क्या फिर लज्जा की ||

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